पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं का और कार्यकर्ताओ का यह व्यवहार वह बदलाव नहीं है, जिसकी बंगाल में अपेक्षा की गई थी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।' उनका और उनके नेताओ का व्यवहार सीधे तौर पर सत्ता के अहंकार का प्रतीक है । उनके कार्यकर्ताओ द्वारा प्रोफेसर के साथ मारपीट सीधे तौर पर एक तरह से गुंडई है । लोकतंत्र मे अपनी अभिव्यक्ति का अधिकार सभी को है और प्रोफेसर ने कुछ ऐसा अश्सिल कार्टून को नहीं इंटरनेट पर डाला है, की उन पर मुकदमा दर्ज हो। ममता इस कृत्य से ऐसा लगता है की वो अपने सत्ता के अंहकार मे चूर है। शायद ममता को यह नहीं मालूम की सत्ता का अहंकार जादा नहीं चलता है ,उन्हे इसका इन्दिरा गांधी और अन्य लोगो से सबक ले कर समझना चाहिए। बंगाल में जिस तरह से उनकी पार्टी के लोग व्यवहार कर रहे है वो क्या है ...?क्या उन सबको कानून के साथ खिलवाड़ करने की छूट है । क्या बंगाल की जनता ने उन्हे इन्ही सब के लिए बदलाव कर सत्ता सौपी है ....।
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